Tuesday, 25 August 2020

Kash Koi Kandha



बीते हुए पल कभी लौटकर नहीं आते, बस मीठी और कड़वी यादे दे जाते है।
अगर लौट कर आते तो हम सारे सुनहरे पलो को पिरो लेते।
काश कोई ऐसा कन्धा होता जिसपर सर रखकर हम रो लेते।

कौन अपना है और कौन पराया समझपाना आज बहुत मुश्किल है।
मुश्किल घडी में अक्सर सभी लोग साथ देने से अपना हाथ धो लेते।
काश कोई ऐसा कन्धा होता जिसपर सर रखकर हम रो लेते।

अपनों के छोड़ जाने का दुःख बहुत होता है, वो लौट कर फिर नहीं आते।
गर वो पौधे होते तो उनके बीज़ आज हम फिर से बो लेते।
काश कोई ऐसा कन्धा होता जिसपर सर रखकर हम रो लेते।

जो मुश्किलों में हाथ थाम लेते थे वो तो एक के बाद एक हमारा साथ छोड़ रहे है।
जिन्होंने चलना सिखाया वो साथ होते तो मंज़िल की ओर उनके साथ हम हो लेते।
काश कोई ऐसा कन्धा होता जिसपर सर रखकर हम रो लेते।

थकान बहुत है और चैन कहाँ है, पैर भी अब लड़खड़ाने लग गए है।
कुछ पल के लिए माँ की गोद मिलजाती तो चैन की नींद हम सो लेते।
काश कोई ऐसा कन्धा होता जिसपर सर रखकर हम रो लेते।

एकांतप्रिय       

Soumen Saha
Cooking is not only one of my hobbies but is my passion. I love to eat very much. According to me cooking is an art. If you have patience and you love cooking then there is no doubt that dishes made by you will be liked and appreciated. And I think this is the most important payback and reward for each and every cook. 
You will be surprised to know that basically I am a Civil Engineer and always dealing with bricks and stones but my love for eating has always helped and inspired me to cook different dishes, to experiment, to improve and give my touch to it. Other than this I love listening to music and singing, playing badminton, writing short stories, songs and poems.
 

8 comments:

  1. Awesome Sir It's very true, n heart touching.

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  2. Very beautiful,It is so real, loved reading

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  3. बहुत सुन्दर लिखा है आपने।

    Thanks for Sharing..
    Regards
    Vijay

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  4. wow soumen da aapne kavita likha? kya baat hai. i like poetry as well as shero shayri.

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